सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

विभत्स हूँ... विभोर हूँ...

विभत्स हूँ... विभोर हूँ...
मैं समाधी में ही चूर हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

घनघोर अँधेरा ओढ़ के...
मैं जन जीवन से दूर हूँ...
श्मशान में हूँ नाचता...
मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

साम – दाम तुम्हीं रखो...
मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

चीर आया चरम में...
मार आया “मैं” को मैं...
“मैं” , “मैं” नहीं...
”मैं” भय नहीं...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

जो सिर्फ तू है सोचता...
केवल वो मैं नहीं...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

मैं काल का कपाल हूँ...
मैं मूल की चिंघाड़ हूँ...
मैं मग्न...मैं चिर मग्न हूँ...
मैं एकांत में उजाड़ हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

मैं आग हूँ...
मैं राख हूँ...
मैं पवित्र राष हूँ...
मैं पंख हूँ...
मैं श्वाश हूँ...
मैं ही हाड़ माँस हूँ...
मैं ही आदि अनन्त हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

मुझमें कोई छल नहीं...
तेरा कोई कल नहीं...
मौत के ही गर्भ में...
ज़िंदगी के पास हूँ...                       
अंधकार का आकार हूँ...
प्रकाश का मैं प्रकार हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

मैं कल नहीं मैं काल हूँ...
वैकुण्ठ या पाताल नहीं...
मैं मोक्ष का भी सार हूँ...    
मैं पवित्र रोष हूँ...
मैं ही तो अघोर हूँ...

*मैं शिव हूँ।*  *मैं शिव हूँ।* *मैं शिव हूँ।*

*अग्रिम शुभकामनाये
*महाशिवरात्रि महापर्व की *

कभी- कभी  तो दिल की भी मान लिया कर!

कभी- कभी  तो दिल की भी मान लिया कर!

गिरधर दान रतनू दासोड़ी

कभी- कभी तो दिल की भी मान लिया कर!
मुरझे हुए चेहरों पर भी मुस्कान दिया कर!!

निष्ठुरता से बने रिस्ते भी भूल जाते हैं लोग!
उत्साह उमंगों की तरंगों का छात तान लिया कर!!

अपनी मस्ती में मस्त में  रहना भी ठीक नहीं यार!
कभी कभी दूसरों के देख अरमान लिया कर!!

लोगों की बातों का क्या ?वो होती रहती है!
अपनी  बातों को सुनाने की कभी ठान लिया कर!!

ये जो चमक दिखाई दे रही है चौंधियाती सी!
ऊपर के मुखौटे भी कभी तो पहचान लिया कर!!

अखबारों की कतरनों पर इठलाने की मत कर!
हकीकत धरातल की सत्यता भी जान लिया कर!!

ज्यादा तानने से जंजीरें भी टूट जाती है यार!
दूसरों के भावों को भी कभी तो सम्मान दिया कर!!

पस्त करने की मंशा से हौंसले पस्त नहीं होते!!
ऐसे में रतनू जोश से जूझने की ठान लिया कर!!

गिरधर दान रतनू दासोड़ी

बुधवार, 22 फ़रवरी 2017

खुद के अवगुण खोजिये.

खुद के अवगुण खोजिये. ,
दूजै के गुण देख. !!
जदे सारथक जांणिये. ,
साचो जीवन शेख. !!1!!

अवगुण देखे और के. ,
तब कां मिळसी तोय. !!
परनिन्दा कज्ज प्रांणिया ,
हांण तिहारी होय  !!2!!

जो तूं चाहै जगत में. ,
भल्ल हुवै तव भाग. !!
श्रीहरी ने समरतां  ,
तन मन अवगुण त्याग. !!3!!

हेत राख भजिये हरी  ,
तजिये दोष तमाम. !!
लगन धार मन लीजिये. ,
रजिये ऐको राम. !!4!!

ध्यान राख नह धोविये  ,
मिनखां तणो ज मेल. !!
परनिन्दा तणें पाप सूं  ,
खोटा होसी खेल. !!5!!
मीठा मीर डभाल

रविवार, 19 फ़रवरी 2017

ऐ मेरे स्कूल मुझे, जरा फिर से तो बुलाना.

*ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना..*

कमीज के बटन
ऊपर नीचे लगाना,
वो अपने बाल
खुद न काढ़ पाना,
पी टी शूज को
चाक से चमकाना,
वो काले जूतों को
पैंट से पोंछते जाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

वो बड़े नाखुनों को
दांतों से चबाना,
और लेट आने पर
मैदान का चक्कर लगाना,
वो प्रेयर के समय
क्लास में ही रुक जाना,
पकड़े जाने पर
पेट दर्द का बहाना बनाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

वो टिन के डिब्बे को
फ़ुटबाल बनाना,
ठोकर मार मार कर
उसे घर तक ले जाना,
साथी के बैठने से पहले
बेंच सरकाना,
और उसके गिरने पे
जोर से खिलखिलाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

गुस्से में एक-दूसरे की
कमीज पे स्याही छिड़काना,
वो लीक करते पेन को
बालों से पोंछते जाना,
बाथरूम में सुतली बम पे
अगरबत्ती लगाकर छुपाना,
और उसके फटने पे
कितना मासूम बन जाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे'*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

वो Games Period
के लिए Sir को पटाना,
Unit Test को टालने के लिए
उनसे गिड़गिड़ाना,
जाड़ो में बाहर धूप में
Class लगवाना,
और उनसे घर-परिवार के
किस्से सुनते जाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,
जरा फिर से तो बुलाना...*

वो बेर वाली के बेर
चुपके से चुराना,
लाल–पीला चूरन खाकर
एक दूसरे को जीभ दिखाना,
खट्टी मीठी इमली देख
जमकर लार टपकाना,
साथी से आइसक्रीम खिलाने
की मिन्नतें करते जाना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

वो लंच से पहले ही
टिफ़िन चट कर जाना,
अचार की खुशबू
पूरे Class में फैलाना,
वो पानी पीने में
जमकर देर लगाना,
बाथरूम में लिखे शब्दों को
बार-बार पढ़के सुनाना...

ऐ मेरे स्कूल मुझे,
जरा फिर से तो बुलाना...

वो Exam से पहले
गुरूजी के चक्कर लगाना,
लगातार बस Important
ही पूछते जाना,
वो उनका पूरी किताब में
निशान लगवाना,
और हमारा ढेर सारे Course
को देखकर सर चकराना...

* ऐ मेरे स्कूल मुझे,*
*जरा फिर से तो बुलाना...*

वो मेरे स्कूल का मुझे,
यहाँ तक पहुँचाना,
और मेरा खुद में खो
उसको भूल जाना,
बाजार में किसी
परिचित से टकराना,
वो जवान गुरूजी का
बूढ़ा चेहरा सामने आना...
तुम सब अपने स्कूल
एक बार जरुर जाना...

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

अजनबी होता शहर देखा

बेगाने होते लोग देखे,
अजनबी होता शहर देखा
हर इंसान को यहाँ,
मैंने खुद से हीं बेखबर देखा।

रोते हुए नयन देखे,
मुस्कुराता हुआ अधर देखा
गैरों के हाथों में मरहम,
अपनों के हाथों में खंजर देखा।

मत पूछ इस जिंदगी में,
इन आँखों ने क्या मंजर देखा
मैंने हर इंसान को यहाँ,
बस खुद से हीं बेखबर देखा।

दुनिया की भीड़ में खो जाते है

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते हैं

अपनी जान से ज़्यादा प्यारा desk top छोड़ कर
अलमारी के ऊप र धूल खाता गिटार छोड़ कर
Gym के dumbles, और बाकी gadgets
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी worksheets, pens और pencils बिखेर कर
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते हैं

मुझे ये colour /style पसंद नहीं
कह कर brand new शर्ट अलमारी में छोड़ कर
Graduation ceremony का सूट, जस का तस
पुराने मोज़े, बनियान , रूमाल, (ये भी कोई सहेज़ के रखने वाली चीज़ है )
सब बेकार हम समेटे हैं, उनको परवाह नहीं
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं

जिस तकिये के बिना नींद नहीं आती थी
वो अब कहीं भी सो जाते हैं
खाने में नखरे दिखाने वाले अब कुछ भी खा कर रह जाते हैं
अपने room के बारे में इतनेpossessive होने वाले
अब रूम share करने से नहीं हिचकिचाते
अपने career बनाने की ख्वाहिश में
बेटे भी माँ बाप से बिछड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते हैं

घर को मिस करते हैं, पर कहते नहीं
माँ बाप को 'ठीक हूँ 'कह कर झूठा दिलासा दिलाते हैं
जो हर चीज़ की ख्वाहिशमंद होते थे
अब  'कुछ नहीं चाहिए' की रट लगाये रहते हैं
जल्द से जल्द कमाऊ पूत बन जाने की हसरत में
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं

हमें पता है,
वोअब वापस नहीं आएंगे, आएंगे तो छुट्टी मनाने
उनके करियर की उड़ान उन्हें दूर कहीं ले जाएगी
फिर भी हम रोज़ उनका कमरा साफ़ करते हैं
दीवारों पर चिपके पोस्टर निहारते हैं
संजोते हैं यादों में उन पलों को,
जब वो नज़दीक थे, परेशान करते थे
अब चाह कर भी वो परेशानी नसीब में नहीं
क्योंकि
बेटे भी बेटियों की तरह घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

दांतों फंसी सुपारी

*गुरु थे, कर्मचारी हो गए हैं । दांतों फंसी सुपारी हो गए हैं ।।*

*महकमा सारा हमको ढूँढता है।*
*हम संक्रामक बीमारी हो गए हैं ।।*

*इसे चमचागिरी की हद ही कहिये।*
*कई शिक्षक अधिकारी हो गए हैं ।।*

*अब वे अकेले  कईयों को नचाते हैं ।*
*और हम टीचर से मदारी हो गए हैं ।।*

*उन्हें अब चाक डस्टर से क्या मतलब ।*
*जो ब्लॉक/संकुल प्रभारी हो गए हैं ।।*

*कमीशन इसमें,उसमें, इसमें भी दो।*
*हम दे-दे कर भिखारी हो गए हैं ॥*

*मिला है MDM का चार्ज जबसे ।*
*गुरुजी भी भंडारी हो गए हैं ॥*

*बी ई ओ ऑफिस को मंदिर समझ कर ।*
*कई टीचर पुजारी हो गए हैं ॥*

*पढ़ाने से जिन्हें मतलब नहीं है ।*
*वो प्रशिक्षण प्रभारी हो गए हैं ॥*

*खटारा बस बनी शिक्षा व्यवस्था ।*
*और हम लटकी सवारी हो गए हैं ।*                               *स्कूलों में पढ़ाने नहीं दे रही  सरकार ।*                             *केवल डाक देने और लेने वाले डाकिया हो गये ।*          *स्कूलों में चारदीवार नहीं होने से ।*                               *जानवरोँ द्वारा फैलाई गंदगी साफ करने वाले ।*                *सफाई कर्मचारी हो गए ।*     *हक की लड़ाई लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है ।*                                          *शिक्षक अब गुरु नहीं रहे केवल सरकारी गुलाम रह गए ।।।।*                               *अब विभाग ई-अटेंडेंस से हमारी निगरानी करेगा ।।।*    *मानो हम "शिक्षक" नहीं, "मोस्ट वांटेड अपराधी" हो गए ।।।*

खुशनुमा

दिल की देहरी  से

आलमे खुशनुमा हो गया
कोई फिर बदगुमां हो गया

सर झुका आया हूँ सजदे में
फर्ज मेरा अदा हो गया

लोग किसको मनाने निकले
कौन खुद से ख़फा हो गया

मंजिले पास आई तभी
दरमियाँ फासला हो गया

बोलते देख कर आईने
तूं क्यों बेजुबाँ हो गगया

©©©©©©©
रतन सिंह चंपावत कृत

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

उलझनों और कश्मकश में..

उलझनों और कश्मकश में..
उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..

ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए..
मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |

लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख - मिचोली का ...
मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l

चल मान लिया.. दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक..
गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l

ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक ...
मुझे क्या फ़िक्र.., मैं कश्तीया और दोस्त... बेमिसाल लिए बैठा हूँ...